तुम और याद..
हाथ छुड़ा कर जा रही है, तुम्हारी याद बिल्कुल तुम्हारी तरह। मैं फिर खड़ा हूँ, यह सोच कर, जैसा मैं ...
prashant sharma द्वारा 27 जून, 2008 7:36:00 PM IST पर पोस्टेड
आगे पढ़ें... >>


लोड हो रहा है...