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चैनल: Blog


ब्लॉग्स (5)
हाथ छुड़ा कर जा रही है, तुम्हारी यादबिल्कुल तुम्हारी तरह।मैं फिर खड़ा हूँ, यह सोच कर, जैसा मैं तुम्हारे लिए सोचता था,कि आएगी तुम्हे मेरी याद और तुम्हारी याद फिर दौड़ आएगी।लेकिन, नहीं होता मैं ही करता जतन तुम्हें याद करने का तुम्हारी याद नहीं आती, तुम्हारी ... आगे पढ़ें...

जरा विवशता देखिए देश की महँगाई आम आदमी को तोड़ रही हैं और चिंता सिर्फ राजनीतिक लोगों को है। उत्तर पूर्व में देश से अलग होने के आंदोलन जोरों पर हैं पर चिंता सिर्फ सरकार को है। गुर्जर आंदोलन हो या कुछ भी हम सिर्फ मूक गवाह बन कर देखते रहते है। क्या सिर्फ ... आगे पढ़ें...

खुशी आखिर है क्या? कहने को तो बहुत कुछ हैं लेकिन यदि गहराई से देखे तो मन का भाव है। तो फिर कुछ देर के लिए यह सोच ले कि हम खुश हैं तो फिर खुशी मिलना तय हैं। आगे पढ़ें...

तुमः 1तुम क्यों चले आते हो सच में,तुम स्वप्न में ही अच्छे लगते हो, कम से कम मेरा कहना तो मानते हो।तुमः २तुम्हे भूल जाना दिल पर पत्थर रखने जैसा था,पर आज इस भरी दुपहरी सी जिंदगी में उसी पत्थर के नीचे,थोड़ी सी नमी बची है।मैं अक्सर वहाँ थोड़ा जी लेता हूँ।तुमः ... आगे पढ़ें...

मैंने कहीं पढ़ा था कि अली सरदार जाफरी साहब फरमा गए है कि हमने जाकर देख लिया है राह गुजर से आगे भी,राह गुजर ही राहगुजर है राहगुजर के आगे भी... मतलब का मतलब यह कि रास्ता ही मंजिल है और चलना जिंदगी और थोड़ी देर अपने मन से जी लेने की मोहलत तो सबको मिली है... ... आगे पढ़ें...