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18 अक्टूबर, 2008


ब्लॉग्स (2)
कुछ दिन होते है..जब कुछ भावनाएँ जोर मारती हैं फिर हम उन्हें मार देते हैं या वे खुद मर जातीहैं फिर कुछ तो दे ही जाती है जैस एक शेर -- उनके ख्याल, उनकी बातें उनकी यादवक्त बहुत किमती है इन दिनों....और एक कविता जैसा कुछ पता चल जाएगाखबर ना देना मुझे यूँ ही पता ... आगे पढ़ें...

कच्ची उम्र और टूटी-फूटी भावनाएँ इनसे ही बनी हैं कुछ अधपकी सी कविताएँ जो उन दिनों के तमाम गड़बड़झाले से प्रेम , प्यार का परिचय है। हाँ आज इनमें दम नहीं लगता पर उन्हें लिख रहा हूँ बिना सुधारे....अब हमने भी सुधर कर क्या कर लिया...है। मौसमहर शाम बनता सँवरता ... आगे पढ़ें...