कच्ची उम्र और टूटी-फूटी भावनाएँ इनसे ही बनी हैं कुछ अधपकी सी कविताएँ जो उन दिनों के तमाम गड़बड़झाले से प्रेम , प्यार का परिचय है। हाँ आज इनमें दम नहीं लगता पर उन्हें लिख रहा हूँ बिना सुधारे....अब हमने भी सुधर कर क्या कर लिया...है। मौसमहर शाम बनता सँवरता ...
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