हाथ छुड़ा कर जा रही है, तुम्हारी याद
बिल्कुल तुम्हारी तरह।
मैं फिर खड़ा हूँ, यह सोच कर,
जैसा मैं तुम्हारे लिए सोचता था,
कि आएगी तुम्हे मेरी याद
और तुम्हारी याद फिर दौड़ आएगी।
लेकिन,
नहीं होता
मैं ही करता जतन तुम्हें याद करने का
तुम्हारी याद नहीं आती, तुम्हारी तरह
कितनी समानता हैं तुममें और तुम्हारी याद में
और मैं हमेशा ही इंतजार में रहा चाहे कल्पना हो या हकीकत..

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