मन का रास्ता क्यो
कुछ नही
मैंने कहीं पढ़ा था कि अली सरदार जाफरी साहब फरमा गए है कि 'हमने जाकर देख लिया है राह गुजर से आगे भी,राह गुजर ही राहगुजर है राहगुजर के आगे भी... मतलब का मतलब यह कि रास्ता ही मंजिल है और चलना जिंदगी और थोड़ी देर अपने मन से जी लेने की मोहलत तो सबको मिली है... बस यह मोहलत जब मिली तो चल पड़े मन के रास्ते पर.... बस यहीं वजह है नाम रखने की और कोई दूर की कौड़ी थोड़ी लाया हूँ । चलो अभी तो बस करें

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